तुलसी सिलावट के बेलगाम अधिकारियों की मनमानी के चलते खतरे में है ग्वालियर का रायपुरा बांध
रायपुरा बांध के आस पास हो रहा अवैध उत्खनन

खोखला हुआ रायपुरा बांध, जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने मुँदी आंखें

ग्वालियर। वो कहावत तो आपने सुनी होगी कि जब सैंया बहे कोतवाल तो डर कहे का कुछ ऐसा ही आज ग्वालियर में अधिकारियों की स्तिथि है जिस तरह से उन्हें सत्ता का समर्थन हासिल है उसके चलते अधिकारी बेलगाम हो ग्वालियर को उजाड़ने में तुले हुए है ऐसा लगता कि जैसे तुलसी सिलावट और उनके प्रिय अधिकारियों ने महाराज सिंधिया के शहर को बर्बाद करने की कसम खा रखी हो, और इस बर्बादी का ठेका चंद सिक्कों की खनक के चलते ठेकेदारों को दे दिया हो । ताज़ा मामला जलसंसाधन विभाग के अंतर्गत आने वाले रायपुरा बांध का है जँहा से आजकल एक बड़ी कंपनी के पेटी ठेकेदार जमकर मिट्टी-मोरम का अवैध उत्खनन कर रहे है स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध उत्खनन से न केवल राजस्व की हानि हो रही है बल्कि जलियजीव व रायपुरा बांध को भी नुकसान पंहुच रहा है इन ठेकेदारों के अवैध उत्खनन के चलते भविष्य में एक बड़ा संकट इस क्षेत्र के लिए खड़ा हो सकता है साथ ही स्वर्ण रेखा नदी का जलप्रवाह भी बाधित हो सकता है जिसका मामला अभी न्यायालय में लंबित है पर यह सत्ता की शह पर मुनाफा कमाने वाली कम्पनियों को कँहा समझ में आता है खैर हमे जो वजह सिंधिया के शहर की दुर्दशा की समझ में आती है उसमें सबसे बड़ा कारण तुलसी सिलावट का ग्वालियर शहर के लिए उदासीन रवैया है जिसके चलते उनके चाहते जलसंसाधन विभाग के मुखिया जँहा एक ओर अपनी जांच को दबाए हुए हैं वंही इस तरह की गतिविधियों पर भी माया का चश्मा पहने बैठे हुए है अब यह नही कहा जा सकता कि यह चश्मा कितने ऊपर तक लोग पहने हुए है पर परिस्थितियां तो जरूर इस ओर इशारा करती हैं कि हमाम में सब नंगे है पूर्व में भी कोबरा खबर ने तुलसी सिलावट के जलसंसाधन विभाग के मुख्य अभियंता को किस कदर मंत्री जी का आश्रय प्राप्त है बताया था जिसकी लिंक https://kobrakhabar.com/2026/04/200-kroad-ke-ghotale-kee-fail-dbae-baitha-mantree-tulsee-silavt-ka-nag/
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का एक मैनेजर भी इस मिट्टी मोरम मामले में शामिल?

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना से जुड़ी हिलवेज कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ग्वालियर वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट का करीब 28.5 किलोमीटर का काम कर रही है जिसके लिए उसने लोकल के ही 6 पेटी ठेकेदारों को काम दिया है यह पेटी ठेकेदार निर्माण में उपयोग होने वाली मिट्टी-मोरम का खनन अवैध रूप से रायपुरा बांध के क्षेत्र से कर रहे है जिसके चलते यह पूरा संकट खड़ा हुआ है और इसमें उनका भरपूर मदद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के एक मैनेजर भी कर रहे है जो इस अवैध मिट्टी-मोरम को कागजों में वैध बना रहे है अब इसके एवज में उन्हें कितना हफ्ता मिलता है इसका खुलासा तो किसी स्वतंत्र एजेंसी की जांच के बाद ही हो पायेगा पर इतना तो जरूर है कि वह अकेले इसके जिम्मेदार नही है ग्वालियर का खनिज विभाग भी उतना ही जिम्मेदार है क्योंकि शहर में इतने बड़े बड़े गढ्ढे हमारे दबंग खनिज अधिकारी को नही दिखते पर हम क्या करे जो उन्हें नही दिखते वो हमें दिख जाते हैं
मध्यप्रदेश आरटीआई फाउंडेशन के अध्यक्ष दे रहे है ज्ञापन

हरबार की तरह भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होने वाले संजय दीक्षित इस बार भी ग्वालियर में हो रहे इस अवैध उत्खनन व जलियजीवों को नुकसान पहुचने वालों के खिलाफ लड़ाई लड़ने को तैयार है उन्होंने कहा है कि वह कलेक्टर ग्वालियर, जलसंसाधन विभाग और प्रदूषण बोर्ड को ज्ञापन देंगे और मांग करेंगे कि
1. हिलवेज कम्पनी एवं उससे जुड़े 6 पेटी ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे उत्खन की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।
2. अवैध उत्खन पर तत्काल रोक लगाकर दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही की जाए।
3. राजस्व को हुई हानि की वसूली की जाए और NHAI मैनेजर पर लगे रिश्वत के आरोपों की भी जांच हो।
4. रायपुर बांध की जैव विविधता संरक्षण हेतु तत्काल सुरक्षात्मक उपाय किए जाएं।




