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NH-46 के निर्माण में घोटाला

EKK कंपनी पर 28.80 करोड़ का जुर्माना वसूलने राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग, NHAI ने छुपाई जानकारी

अवैध खनिज भंडारण के मामले में EKK इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड का जुर्माना बढ़ा कर 28 करोड़ 80 लाख करने की राज्यपाल से मांग

ग्वालियर से देवेन्द्र तिवारी की खबर

ग्वालियर/शिवपुरी, 16 अप्रैल। देश में भ्रष्टाचार की जड़े इतनी गहरी जम चुकी है कि यदि मंत्री प्रधानमंत्री कितनी भी नेक नियत से काम करें भ्रष्टाचारी अफसर और ठेकेदार मिलकर कोई न कोई उपाय भ्रष्टाचार करने का निकाल ही लेते है जँहा भारत सरकार एक ओर सड़क निर्माण को लेकर संजीदा है और विश्व स्तरीय हाईवे बनाने को प्रतिबद्ध है नितिन गडकरी जैसे भारत सरकार के मंत्री अपनी पूर्ण लगन और ईमानदारी से प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में लगे हैं वंही उनके ही विभाग के कुछ अधिकारी देश के खनिज संपदा की चोरी करवाने में कुछ भ्रष्ट कंपनियों का साथ दे रहे है हलोय मामला, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के 209.01 करोड़ के ग्वालियर-शिवपुरी NH-46 प्रोजेक्ट में बड़ा भ्रष्टाचार का है । ठेकेदार कंपनी EKK Infrastructure Limited पर अवैध खनिज भंडारण के मामले में लगे 14.40 करोड़ के जुर्माने को चार माह बाद भी नहीं भरने पर अब दोगुनी राशि यानी 28 करोड़ 80 लाख वसूलने की मांग उठी है। मामले में प्रदेश के महामहिम राज्यपाल से हस्तक्षेप कर NHAI के दोषी अधिकारियों को निलंबित करने और कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग भी उठी है

NHAI द्वारा आरटीआई में छुपाई गई जानकारी, शिवपुरी खनिज विभाग ने छापा मार 40 हज़ार घन मीटर अवैध गिट्टी पकड़ी

 सिस्टम में यदि एक भी ईमानदार आदमी फंस जाए तो इन भ्रष्टाचारियों की पोल खुल जाती है शिवपुरी के खनिज अधिकारी पर जब अवैध भंडारण की शिकायत पँहुची तो उन्होंने इसको गंभीरता से लेते हुए EKK कंपनी के भण्डार स्थल पर छापामार कार्यकहि करी और करीब 40 हज़ार घन मीटर के बारे में कंपनी कोई दस्तावेज नही पेश कर पाई जिसके चलते विभाग द्वारा 40 हजार घन मीटर गिट्टी को अवैध माना और कम्पनी को 14लाख 40 हजार का जुर्माना भरने का आदेश दिया जिसे अभी तक नही भरा गया है EKK कंपनी के पूरे खेल को उजागर करने के लिए आरटीआई फाउंडेशन के अध्यक्ष संजय दीक्षित ने 25 नवंबर 2025 को NHAI ग्वालियर प्रोजेक्ट कार्यालय में आवेदन देकर EKK समेत सभी निर्माण कंपनियों द्वारा स्थापित खनिज भंडारण कैंपों की जानकारी मांगी थी। प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने जानकारी देने से इनकार कर दिया। अतः जानकारी छुपाए जाने की शिकायत खनिज विभाग से करने पर शिवपुरी के खनिज अधिकारी ने 13 दिसंबर 2025 को ग्राम भानगढ़ स्थित EKK के कैंप पर छापा मारा।जांच में मौके पर लगभग 40,000 घन मीटर गिट्टी का अवैध भंडारण पाया गया। कंपनी कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी। म.प्र. खनिज नियम-2022 के अध्याय-पांच नियम-18 के तहत रॉयल्टी दर 120 रु प्रति घन मीटर के हिसाब से 48 लाख की रॉयल्टी बनती है। नियमों के अनुसार रॉयल्टी का 15 गुना अर्थदंड यानी 7.20 करोड़ और इतनी ही पर्यावरण क्षतिपूर्ति जोड़कर कुल 14 करोड़ 40 लाख का जुर्माना प्रस्तावित किया गया।

चार माह बाद भी जुर्माना जमा नहीं, अब दोगुना वसूली की मांग

खनिज अधिकारी की रिपोर्ट 22 दिसंबर 2025 को जारी हुई थी, लेकिन चार माह बीतने के बाद भी EKK ने न तो जुर्माना भरा और न ही प्रशमन कराया। म.प्र. खनिज नियम-2022 के नियम 19(1) के उप नियम (2) में स्पष्ट प्रावधान है कि प्रशमन न होने पर कुल शास्ति की दोगुनी राशि वसूली जाएगी। इसी आधार पर अब *28 करोड़ 80 लाख* वसूलने की मांग की गई है।

संजय दीक्षित की राज्यपाल से  हैं तीन प्रमुख मांगें

 

संजय दीक्षित ने राज्यपाल को भेजे पत्र में NHAI में व्याप्त भ्रष्टाचार का हवाला देते हुए तीन मांगें रखी हैं:

1. *जुर्माना दोगुना वसूला जाए*: EKK से सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के तहत 28.80 करोड़ की वसूली के निर्देश दिए जाएं।

2. *दोषी अधिकारी निलंबित हों*: RTI में जानकारी छुपाने वाले NHAI ग्वालियर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर समेत दोषी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।

3. *कंपनी ब्लैकलिस्ट हो*: EKK Infrastructure Limited को भविष्य के सभी सरकारी टेंडरों से प्रतिबंधित कर ब्लैकलिस्ट किया जाए।

209 करोड़ का प्रोजेक्ट है NH-46

उल्लेखनीय है कि EKK को ग्वालियर-शिवपुरी NH-46 के किमी 0.000 से किमी 125.380 तक राइडिंग क्वालिटी सुधार और रूटीन मेंटेनेंस का काम 16 मई 2025 को EPC मोड पर 209.01 करोड़  में आवंटित हुआ था। इसी प्रोजेक्ट के निर्माण में अवैध खनिज का उपयोग किया जा रहा था।

इस प्रकार बनाता EKK पर 28 लाख 80 हज़ार जुर्माना

*अवैध खनिज*: गिट्टी 40,000 घन मीटर

 *रॉयल्टी*: 48,00,000 रु

*अर्थदंड (15 गुना)*: 7,20,00,000 रु

*पर्यावरण क्षतिपूर्ति*: 7,20,00,000 रु

कुल जुर्माना*: 14,40,00,000 रु

प्रशमन न होने पर दोगुना*: 28,80,00,000 रु

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