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कँही परिवहन विभाग टूलकिट का शिकार तो नही?

हाइवे पर जाम व चेकपोइंटों पर सरकारी कार्य में अड़ंगा लगाना कितना जायज

परिवहन अमले पर अवैध वसूली के आरोप लगा कर, अराजकता फैलाना ,कँही किसी टूलकिट का हिस्सा तो नही ?

ग्वालियर से देवेन्द्र तिवारी की खबर

ग्वालियर। आजकल सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ वीडियो वायरल किये जा रहे हैं जिनको प्राथमिक तौर पर देखने पर ऐसा लगता है कि कुछ लोग देश से भ्रष्टाचार मिटाने रोडों पर घूम रहे है और देश मे व्याप्त भ्रष्टाचार के प्रति असंतोष किस तरह लोगो में रोष पैदा कर रहा है, दिखा रहे है हमारी पोल खोल की टीम ने भी पहले यही समझा कि यह कुछ जुनूनी लोगों द्वारा भ्रष्टाचार को मिटाने की मुहिम है पर जब हमारी टीम ने घंटो इन सोशल मीडिया अकाउंट व यूट्यूब चैनलों की गहन जांच की तो कुछ परिस्तिथि जन्य साक्ष्य हमारे सामने आए जो इस ओर इशारा कर रहे थे कि ज्यादा तर अकाउंट किसी खास पार्टी के नेताओं अथवा एक खास समुदाय के लोगों के द्वारा चलाये जा रहे है वंही से हमारे जहन में यह प्रश्न खड़ा होने लगा की जिस तरह से किसान आंदोलन व CAA के दौरान लोगों को अफवाओं के माध्यम से बरगलाया गया था क्या उसी पैटर्न पर देश की लाइफ लाइन चलाने वाले वाहन चालकों को तो नही बरगलाया जा रहा है ? अगर यह है तो यह बहुत ही गंभीर विषय है और देश की जिम्मेदार एजेंसियों को इसका तुरंत संज्ञान लेना चाहिए तथा इन यूट्यूब चैंनलों व कथित भ्रष्टाचार विरोधी संगठनों को वित्यपोषित करने वाले स्त्रोतों की जांच की जानी चाहिये । क्योंकि यह एक ऐसी व्यवस्था को टारगेट कर रहे हैं जो पूरे देश की लाइफ लाइन मानी जाती है और सीधे तौर पर आमजन की आपूर्ति से जुड़ी हुई है यदि इनके मंसूबे सफल हुए तो देश में एक अराजकता का माहौल बनेगा और देश में अस्थिरता आएगी । इसलिए सरकार को चाहिये कि इसे गंभीरता से ले और जल्द ही इसके विषय में कोई ठोस कदम उठाये ।

परिवहन विभाग व पुलिस को निशाना बनाने वालों के निशाने पर हैं भाजपा शासित राज्य 

जी हाँ आप सही समझ रहे हैं हमारी पोल खोल की टीम के गहन अध्ययन के दौरान यह बात भी देखने में आई है कि तथाकथित भ्रष्टचार विरोधी व परिवहन विभाग व पुलिस को अवैध वसूली के कटघरे में खड़े करने वाले यूट्यूब चैनल के द्वारा ज्यादातर भाजपा शासित राज्यों के ही वीडीयो अपलोड किए जाते है हिमाचल तेलंगाना कर्नाटक पंजाब तमिलनाडु पक्षिम बंगाल व केरल जैसे राज्यो में राम राज्य आ चुका है वँहा पूर्णरूप से भ्रष्टाचार खत्म हो चुका है बस यही बात इन कथित भ्रष्टाचार विरोधियों को शंका के घेरे में खड़ा कर देती है और किसी टूलकिट की ओर इशारा करती है इस टूल किट का उद्देश्य मात्र भाजपा शासित राज्यों व केंद्र सरकार के प्रति लोगों को उकसाना व भड़काना है ताकि एक असंतोष जनक माहौल देश में बनाया जाए और बांग्लादेश श्रीलंका व नेपाल जैसा कोई जन आंदोलन खड़ा किया जा सके इसलिए ऐसे लोगों पर समय रहते अंकुश लगाना चाहिए तथा देश की लाइफ लाइन चलाने वाले वाहन चालकों को भी इनके मंसूबों से सावधान रहना चाहिये इन कथित भ्रष्टाचार विरोधी का उद्देश्य किसी भी वाहन चालक को न्याय दिलाना नही अपितु अपना उल्लू सीधा करना है प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को ऐसे लोगों से सख्ती से निपटना चाहिये नही तो यह लोग कभी भी किसी अनहोनी के जनक बन सकते है और मध्यप्रदेश की भाजपा शासन की छवि को धूमिल।कर सकते हैं

हाइवे पर जाम व चेकपोइंटों पर सरकारी कार्य में अड़ंगा लगाना कितना जायज

जिस तरह से परिवहन विभाग व पुलिस को उनके काम से रोकने के लिए इन कथित भ्रष्टाचार विरोधियों व यूट्यूब चैंनलों द्वारा दबाब बनाया जाता है वह स्वम् ही इसके अनैतिक होने का प्रमाण है जिस तरह कुछ लोग झुंड बनाके बिना किसी प्राधिकार के ही चेकपोइंटों व फ्लाइंग पर छापा मार कार्यवाही कर रहे हैं और कर्मचारियों पर दबाब डाल रहे है वो न तो वैधानिक है ना ही तर्कसंगत आप किसी पर भी अवैध वसूली का आरोप बिना प्रमाण के लगा दो और वीडियो बना कर उसे दुष्प्रचारित करो यह कँही से भो न्याय संगत नही है हम मानते हैं कि कुछ जगह वसूली होती है तो उसको रोकने व विरोध करने की भी एक न्यायिक प्रक्रिया है यूँही उठाकर कानून को अपने हाँथ में लेना कँही से भी उचित नही है यह सिर्फ सनसनी फैलने का एक तरीका मात्र है जिस के आधार पर इसे केवल अराजकता फैलाने का टूल माना जा सकता है पर इन कथित भ्रष्टाचार विरोधियों से न्याय संगत कार्यवाही की उम्मीद थोड़ा बेमानी है क्योंकि इनके रोल मॉडल अधेड़ उम्र के एंग्री यंग मैन नेता आजकल इसी तरह के व्यवहार को राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित कर रहे है जिसकी देखा देखी हर छोटा बड़ा नेता अपने आप को इसी शैली में ढाल रहा है और अपने सामर्थ्य के अनुसार सरकारी तंत्र को गाली दे रहा है खैर हमे क्या यह तो बड़े लोगों की बाते हैं पर हमारा उद्देश्य केवल उस समस्या की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान खींचना है जिस का खमियाजा भविष्य में आमजनता को भुगतना पड़ सकता है

 

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