ज्योतिरादित्य सिंधिया के ग्वालियर की साख को बट्टा
ग्वालियर मुख्यलय में काम करना नही पसन्द अधिकरियों को

परिवहन आयुक्त कार्यालय भोपाल शिफ्ट करने की तैयारी

ग्वालियर से देवेन्द्र तिवारी की खबर
ग्वालियर। 19 वीं सदी से भारतवर्ष में सिंधिया राजघराने की आन बान शान रहे ग्वालियर के मध्यप्रदेश में शामिल होने के बाद से ही सौतेला व्यवहार किया जा रहा है कभी मध्य भारत प्रदेश की राजधानी रहा ग्वालियर लगातार राजनैतिक व प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार रहा है एक बार फिर इसी उपेक्षा के चलते एक और षड़यंत्र कुछ प्रशासनिक अधिकारियों व राजनेताओं के द्वारा रचा जा रहा है सूत्रों की माने तो इन अधिकारीयों व नेताओं की मनमानी के चलते मध्यप्रदेश के गठन के समय ग्वालियर के प्रभुत्व और गौरव को बनाये रखने के लिए जो प्रशासनिक ढांचे के प्रमुख चार राज्य स्तरीय विभागों के मुख्यालय ग्वालियर को मिले थे , उनमें से एक कार्यालय , आयुक्त परिवहन मध्यप्रदेश जिसका मुख्यालय ग्वालियर में स्तिथ है, इसी को भोपाल शिफ्ट करने की कवायत काफी दिनों से चल रही है । और अब तो इसकी फ़ाइल भी पिछले दस-पंद्रह दिनों से बड़ी तेजी से अधिकरियों की टेबलों पर कुलांचे भर रही है और ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ ही समय में यह अपनी अंतिम अवस्था मे भी पंहुच जाएगी । फ़ाइल की इस रफ्तार को देखते हुए तो यही लगता है कि इसमें राजनैतिक मौन स्वीकृति भी है जहां सोशल मीडिया पर लोग ग्वालियर के रेल्वे स्टेशन के जिर्णोधार के बाद क्रेडिट के नाम की लड़ाई लड़ रहे हैं वंही अधिकारियों और राजनेताओं ने चोरी चुपके परिवहन विभाग के मुख्यालय को ग्वालियर से छिनने की साजिश रच ली है और ग्वालियर की साख को बटा लगाने की तैयारी कर दी है यह सब तब हो रहा है जब ग्वालियर के प्रभारी मंत्री अपने आपको सिंधिया का बड़ा सिपाही बताते है और सिंधिया के ग्वालियर की साख को बढ़ाने का दावा करते हैं पर लगता है कि उन्हें भी अधिकारियों की तरह सिंधिया के ग्वालियर में रहना पसन्द नही है शायद इसलिये ही वह कभी कभार सिंधिया जी के आगे पीछे ही खड़े नजर आते हैं खैर हमे क्या यह तो प्रशासनिक निर्णय है पर जिस ग्वालियर को सिंधिया राजघराने ने देश की शान बनाने में कोई कसर नही छोड़ी उस शहर के नागरिक होने के नाते इतना तो बनता है कि जो काम उनके सिपाही नही कर रहे उसको कम से कम ग्वालियर के महाराज के कानों तक तो पँहुच दें।
अपनी सहूलियत के चलते नही बैठते विभाग प्रमुख कार्यालयों में

मध्य भारत के मध्यप्रदेश में विलय के बाद ग्वालियर के प्रभुत्व को बनाये रखने के लिए ग्वालियर को चार महत्वपूर्ण प्रशासनिक ढांचे के मुख्यालय दिए गए थे जो कि आबकारी, परिवहन भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त राजस्व मंडल व लोकल फण्ड एवं ऑडिट हैं जिनके विभाग प्रमुख ग्वालियर में स्तिथ इन कार्यालयों में बैठते थे पर अब लगता है कि इन विभाग के प्रमुखों को ग्वालियर में कुछ खास नज़र नही आता तभी यह महीनों तक अपने मुख्यालय नही आते और भोपाल में ही कैम्प ऑफिस के माध्यम से अपने काम करते हैं जिनकी देखा देखी इनके कनिष्ठ भी ऑफिसों से नदारद रहते हैं जिसके चलते न केवल काम प्रभावित होता है बल्कि धीरे धीरे इन मुख्यालयों की भूमिका भी प्रशासनिक अमले में कम होती जा रही है और एक माहौल इन्हें शिफ्ट करने का बन रहा है इसके पीछे जितनी बड़ी वजह अधिकारियों का सहूलियत के स्वार्थ है उतनी ही बड़ी वजह राजनैतिक उदासीनता है जहाँ एक ओर क्षेत्र के नेता आपसी लड़ाई में व्यस्त है




