MP अजब है भ्रष्टाचार में गजब है
मामला नगरीय प्रशासन में हुई पदोन्नति में भ्रष्टाचारियों को प्राथमिकता देने का
एमपी अजब है भ्रष्टाचार में गजब है

देवेन्द्र तिवारी की विशेष खबर
ग्वालियर। मध्यप्रदेश के पर्यटन विभाग के एक बहुचर्चित विज्ञापन को आपने जरूर देखा अथवा सुना होगा एमपी अजब है सबसे गजब है जिसका उद्देश्य मध्यप्रदेश की विरासत को बताना था पर प्रदेश के अधिकारी की करतूतों के चलते यह बहुचर्चित विज्ञापन थोड़े बदलाव के साथ प्रदेश की भ्रष्टाचार वाली छवि को बताने के लिए आम लोगों में अब मजाकिया तौर पर उपयोग होने लगा है मध्यप्रदेश के बदहाल सरकारी तंत्र को बताने के लिए एमपी अजब है भ्रष्टाचार गजब है एक नया विज्ञापन जनता ने गढ़ लिया है ताज़ा मामला प्रदेश में लगभग 10 साल बाद कानूनी राय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के आधार पर सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति (प्रमोशन) का रास्ता साफ होने के बाद पदोन्नति में हो रही गड़बड़ियों से संबंधित है हाला ही में नगरीय प्रशासन में हुई पदौन्नति में एक ऐसा अजब मामला देखने को मिली जो इस बात को साबित करने के लिए काफी थी कि एमपी वाकई अजब है हमारी पोल खोल की टीम को नगरीय प्रशासन की लिस्ट में एक ऐसे अधिकारी का नाम दिखा जिस पर अभियोजन हेतु स्वीकृति का पत्र हाल ही में भोपाल लोकायुक्त ने आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास को लिखा जिसे अनदेखा कर उप सचिव प्रमोद शुक्ला द्वारा सुधीर मिश्रा को पदौन्नति दे दी गयी
लोकायुक्त की जांच में 1लाख 17 हजार की रिश्वत लेने के मामले में फंसे हुए हैं सुधीर मिश्रा

सुधीर मिश्रा पर लोकायुक्त में रिश्वत लेने का एक मामला 2019 में दर्ज हुआ था जिसका अपराध क्रमांक 147/2019 है पिछोर नगर परिषद अध्यक्ष के बेटे से ही 1.17 लाख रिश्वत ले रहे थे सीएमओ
ठेकेदारों को वर्क ऑर्डर जारी करने के लिए मांगे थे पैसे, ठेकेदारों ने की थी अध्यक्ष के बेटे से सीएमओ सुधीर मिश्रा की शिकायत लोकायुक्त पुलिस ने पिछोर नगर परिषद के सीएमओ सुधीर मिश्रा को 1.17 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ लिया था । वे नगर परिषद अध्यक्ष संजय पाराशर के बेटे मयंक पाराशर से ही ठेकेदारों को विभिन्न कामों के वर्कऑर्डर जारी करने के एवज में रिश्वत ले रहे थे। फरियादी मयंक का कहना था कि ठेकेदारों की शिकायत पर जब उन्होंने सीएमओ से वर्क ऑर्डर जारी करने की बात कही तो उन्होंने कहा था, सिस्टम से ही काम होगा। जिसकी शिकायत लोकायुक्त ग्वालियर में कई गई थी और सुधीर मिश्रा को रंगे हाथों पकड़ा गया था
क्या नगर पालिका अध्यक्ष के बेटे से रिश्वत मांगने के ईनाम के तौर पर मिली विभाग से पदोन्नति ?

अब यह एक बिडम्बना ही है कि जो अधिकारी अध्यक्ष के बेटे से ही रिश्वत लेते पकड़ा गया ,उसे नगरीय प्रशासन के आला अधिकारी न केवल, लोकायुक्त के अभियोजन स्वीकृति के प्रस्ताव को रोकने का प्रयास कर रहे हैं बल्कि उसे पुरुष्कार के तौर पर पदौन्नति भी दे रहे है शायद उन पर लगा आरोप ही इसकी वजह है जो चीख-चीख कर बता रहा है कि जो व्यक्ति जिस पिछोर नगर पालिका का cmo होकर उसी नगर पालिका के अध्यक्ष के बेटे से रिश्वत मांग सकता है वो इस भ्रष्ट सिस्टम को कितने अच्छे से जानता होगा खैर मध्यप्रदेश के इस सरकारी तंत्र में कई खामियां है पर इस तरह से नियम कायदों और नैतिकता को ताक पर रख कर भ्र्ष्टाचार के आरोपियों को आंख बंद करके पदोन्नति दे देना केवल खामी नही है अपितु प्रदेश के लाचार सिस्टम पर बेलगाम अधिकारियों का तंज है।





