200 करोड़ के घोटाले की फ़ाइल दबाए बैठा मंत्री तुलसी सिलावट का नाग ?
मामला जलसंसाधन विभाग में हुए खनिज-श्रम घोटाले का

ग्वालियर से देवेन्द्र तिवारी की खबर
ग्वालियर। लोक-सेवको व सरकारी अधिकारियों को कुछ समय अंतराल में दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित न करने का दुष्परिणाम क्या होता है इसको समझना है तो आपको जलसंसाधन विभाग में चल रही 200 करोड़ के खनिज-श्रम कानून घोटाले जांच को देखना चाहिए जो राज्यपाल के हस्तक्षेप के बाद भी लंबित है भ्रष्टाचारियों ने फाइलों को जाने किस कब्र में गाड़ दिया कि लाख जतन करने के बाद भी विजिलेंस जांच कागजों से बाहर ही नही आ पा रही मामला यूँ है कि RTI फाउंडेशन के अध्यक्ष संजय दीक्षित ने 16 अगस्त 2024 को प्रमुख अभियंता जलसंसाधन विभाग से एक शिकायत के दौरान खुलासा किया था कि यमुना कछार में करोड़ो के बांध और नहर निर्माण में ठेकेदारों ने खनिज रॉयल्टी हड़प ली और मजदूरों का PF-ESI तक नही जमा किया कुल मिलाकर करीब 200 करोड़ का घोटाला हुआ है इन्ही ठेकेदारों ने भिण्ड मुरैना में मुख्य अभियंता एस के वर्मा के कार्यपालन यंत्री रहते समय काम किया है अब चूंकि एस के वर्मा प्रभारी मंत्री की कृपा से यमुना कछार के मुख्य अभियंता है तो एस के वर्मा ने प्रमुख अभियंता मिश्रा जी के द्वारा विजिलेंस को सौंपी जांच के बाद फ़ाइल ऐसी दबाई की शिकायत के 16 महीने बाद भी जांच अभीतक शुरू ही नही हो पाई अब इसे फ़ाइल पर कुंडली मारकर बैठना नही कहे तो क्या कहें । जलसंसाधन मंत्री जी जिस जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं उसी जिले कार्यालय में बैठने वाले उनके मंत्रालय के मुख्य अभियंता पर भ्रष्टाचार के आरोप है और वो बड़ी साफगोई से पूरी जांच को प्रभावित कर रहे है यदि मंत्री महोदय इस चीज से अनिभिज्ञ हैं तो सोचिये अधिकारी किस तरह से मंत्रियों के नाक के नीचे अपनी कारगुजारियों को अंजाम दे रहे है ।
राज्यपाल के आदेश की भी कर रहे है मगरूर अधिकारी अवमना

जब अधिकारी को सत्ता से संजीवनी प्राप्त हो तो वह निरंकुश हो जाता है उसे न शिकायत का डर होता है ना ही जांच का ख़ौफ़ अब जलसंसाधन विभाग के 200 करोड़ के खनिज-श्रम घोटाले में जिस अधिकारी के ऊपर ठेकेदारों को फायदा पंहुचने का आरोप है उसी को उस कार्यालय का प्रमुख बना दिया गया । अब बिडम्बना यह है कि कोई अफसर अपने खिलाफ हो रही जांच को कितना सहयोग करेगा अतः हुआ वही जो होना था उन्होंने जांच को लंबित करने की चेष्ठा में यह तक नही देखा कि आदेश राजभवन से आया है और राज्यपाल के आदेश को भी अनदेखा कर पिछले चार महीने से फाइलों में दबा रखा है अब यह जांच कब तक अपने अंजाम पर पंहुचेगी आप खुद ही समझ सकते है पर जलसंसाधन मंत्री व मुख्यमंत्री यदि इस जांच को वाकई अंजाम तक ले जाना चाहते हैं तो एस के वर्मा को मुख्य अभियंता यमुना कछार कार्यालय से पृथक करना होगा अन्यथा जांच को प्रभावित करने यह शंका सदैव रहेगी ।
सिंधिया कोटे के जलसंसाधन मंत्री की खुली छूट का नतीजा कर्तव्य विमुख अधिकारी

ग्वालियर की पत्रकार लॉबी में एक बात पुछले वर्ष बड़ी चर्चा का विषय रही जब जल संसाधन मंत्री से किसी पत्रकार महोदया ने अक्सर पत्रकारों से दूरी बनाकर रखने और सवालों से भागने वाले मुख्य अभियंता एस के वर्मा की शिकायत लहजे में टेलीफोन से पूँछ तो मंत्री जी ने कहा कि उन्होंने अपने अधिकारियों को विकास कार्य करने की खुली छूट दे रखी है शायद खुली छूट का गलत मतलब अधिकारियों ने निकल लिया है या फिर मंत्री महोदय उनको स्पष्ट नही कर पाए कि छूट काम करने की है काम ना करने की नही तभी तो जलसंसाधन विभाग के ग्वालियर स्तिथ मुख्य अभियंता कार्यालय में प्रश्न पूछने वाले पत्रकारों से मिलने में भी गुरेज किया जाता है अधिकारी तो मंत्री जी की खुली छूट का इतना नाजायज फायदा उठा रहे हैं कि सूचना के अधिकार में मांगी जानकारी न देने के लिए भी तत्पर तैयार रहते हैं और ऐसे ही कर्तव्य विमुख अधिकारियों के कुशल प्रशासन का नतीजा फिर घोटालों के रूप में बाहर आता है हाल ही में हुआ दो सौ करोड़ का घोटाला और उसकी जांच दोनों इसका उदाहरण हैं
कैसे दफन हुआ 200 करोड़ का घोटाला

*16.08.2024*: संजय दीक्षित की शिकायत, विजिलेंस को जांच*अगस्त 2024 – अप्रैल 2026*: 20 महीने बाद भी जांच शुरू नहीं, फाइल गायब
*05.12.2025*: राज्यपाल ने लोकायुक्त जांच को कहा
*28.04.2026*: राज्यपाल का आदेश भी फाइलों में दबा, कार्रवाई शून्य । RTI फाउंडेशन के अध्यक्ष संजय दीक्षित के अनुसार यह सीधा-सीधा 200 करोड़ का घोटाला है। भिंड-मुरैना में CE एसके वर्मा के कार्यपालन यंत्री रहते यही ठेकेदारों ने काम किए। अब वही CE बनकर अपनी ही जांच दबाकर बैठे हैं। विजिलेंस, CE, ACS – सबने फाइलें दबा दी हैं।” वंही जब “RTI में जानकारी चाही गई तो लोक सूचना अधिकारी फाइल नहीं मिल रही का बहाना बना देते है । सजंय दीक्षित का तो यँहा तक मानना ही कि 16 महीने से जांच इसलिए नहीं हुई क्योंकि जांच हुई तो CE से लेकर ठेकेदार तक जेल जाएंगे। भ्रष्टाचारियों ने मिलकर 200 करोड़ का मामला दफन कर दिया है।”
भ्रष्टाचार मिटाने आर-पार की लड़ाई का एलान-संजय दीक्षित
वर्तमान में ग्वालियर यमुना कछार के प्रभारी चीफ इंजीनियर और मुरैना संभाग के अधीक्षण यंत्री। बरसों से ग्वालियर संभाग में ही तैनात। भिंड-मुरैना में कार्यपालन यंत्री रहते जिन कामों में घोटाला हुआ, अब उन्हीं की जांच दबाकर बैठे हैं। अब आरटीआई फॉउंडेशन के अध्यक्ष अब इस घोटाले के खुलासे के लिए हर सम्भव प्रयास किया जाएगा ताकि दोषियों को सजा दिलाई जा सके ।
1. *लोकायुक्त में FIR*: CE एसके वर्मा, तत्कालीन विजिलेंस अधिकारी और ACS के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम में केस दर्ज कराने के लिए आवेदन।
2. *हाईकोर्ट में याचिका*: राज्यपाल के 05.12.2025 के आदेश का पालन न करने पर अवमानना याचिका।
3. *CBI जांच की मांग*: मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा जाएगा कि विभाग अपने अफसरों को बचा रहा है, CBI जांच हो।




